प्रिय पाठकों !


प्रिय पाठकों !
बहुत लोग हमें इनबॊक्स मैसेज करके कहते हैं-
आपकी दर्द से लबरेज़ तहरीर दिल में उतर जाती है...
आपकी तहरीर ने हमें रुला दिया...
आपकी तहरीर रूह को ज़ख़्मी कर देती है... और भी ऐसा ही बहुत कुछ...

प्रिय पाठकों,
हम आप सबसे माज़रत चाहते हैं... क्या करें, हमारी क़लम ज़ेहन के अख़्तियार में नहीं... हम कुछ सोचकर नहीं लिखते... जब लिखने बैठ जाते हैं, तो क़लम ख़ुद-ब-ख़ुद लफ़्ज़ चुन लेती है... जो दिल में होता है, वो अल्फ़ाज़ बनकर तहरीर की शक्ल अख़्तियार कर लिया करता है... वो चाहे नज़्म हो, ग़ज़ल हो, गीत हो या फिर कोई अफ़साना...
ज़िन्दगी हमेशा सतरंगी और ख़ुशनुमा नहीं हुआ करती... ज़िन्दगी में ख़ुशी के उजले दिन होते हैं, तो दुखों भरी स्याह रातें भी हुआ करती हैं... आंखों में इंद्रधनुषी ख़्वाब होते हैं, तो ख़्वाब टूटने पर आंखों से आंसुओं का दरिया भी बहता है...
फ़र्क़ बस इतना है कि क़ातिबे-तक़दीर ने किसी की क़िस्मत में ख़ुशियों भरी ज़िन्दगी लिख दी होती है, तो किसी के मुक़द्दर में सिर्फ़ अज़ाब लिख छोड़ा होता है...

इसलिए एक बार फिर आप सबसे माज़रत चाहते हैं...
  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • Twitter
  • RSS

3 Response to "प्रिय पाठकों !"

  1. राजेंद्र कुमार says:
    30 अक्तूबर 2014 को 12:07 pm

    आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (31.10.2014) को "धैर्य और सहनशीलता" (चर्चा अंक-1783)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

  2. ऋषभ शुक्ला says:
    31 अक्तूबर 2014 को 2:05 pm

    very nice

    http://hindikavitamanch.blogspot.in/

  3. Lekhika 'Pari M Shlok' says:
    31 अक्तूबर 2014 को 9:55 pm

    Bilkul kavi ke shabd jehan ki nhi man ki upaj hoti hai... Fir chaahe dard bhara afsana ho ya khushi ka geet ... Bahut sunder prastuti !!

एक टिप्पणी भेजें